Tuesday, May 1, 2018

पचमढ़ी (Queen of satpura) का सफर पार्ट-1


हैलो दोस्तों
             एक बार फिर स्वागत है आपका  बंजारा सफर में, अभी हमारा सफर चल रहा है , भारत के दिल मध्य प्रदेश की ओर, तो बस अब हम रुख  करते है, मध्य प्रदेश के एक और शहर की तरफ जो प्राकृतिक  सुंदरताओं से भरा हुआ है ,और जो आपको प्रकृति और खुद के एक कदम और पास ले आती है |
तो आज बात करते है मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी की जिसे लोग सतपुरा की रानी भी कहते है , जिसकी हर एक जगह आपको रुकने को मजबूर कर देगी जिसका एहसास व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ जायेंगे चाहे बात हो धूपगढ़ की सुबह की या महादेव हिल्स की , तो ज्यादा समय लेते हुए हम शुरू करते है अपने सफर की तो हमारा सफर शुरू हुआ भोपाल से अगर आप प्लेन से रहे है तो भोपाल में उतरकर यहाँ से मप्र टूरिज़म की बस से सीधे पचमढ़ी पहुंच सकते है , ये बस फुल ac  और बहुत आराम दायक बस है आपको सफर में एक अलग आंनद मिलेगा ,वैसे हम इसी रुट से गए थे तो मै अपने अनुभव से बता रहा हूँ बाकि सफर आपका और फैसला भी आपका वैसे अगर आप ट्रैन से जा रहे है तो आप पिपरिया उतरकर वह से बस या टेक्सी से पचमणी जा सकते है |
                                                                               तो हम अपने सफर की बात कर रहे थे तो हमने अपना सफर शुरू किया  दिल्ली से भोपाल और भोपाल से पचमणी ये जून का मौसम था यहाँ पहुंच कर हमने होटल बुक की और आराम किया ताकि दूसरे दिन नए जोश के साथ सफर का आनंद लिया जाये |


जटाशंकर महादेव 


पचमढ़ी का दूसरा दिन आँख थोड़ी देर से खुली और शायद इतनी अच्छी नींद हमने बचपन मै ही ली थी तो हम जल्दी तैयार होकर नीचे पहुंच कर नास्ता किया और आगे का प्लान बनाया वैसे पचमढ़ी को भगवान् महादेव का दूसरा घर भी कहा जाता है तो सोचा क्योना सफर की शुरुवात महादेव के दर्शन से करे तो हमने अपना रुख किया जटाशंकर महादेव की तरफ
                                                                                      जटाशंकर मुख्य मार्ग से 200  मीटर नीचे पहाड़ो से घिरा कलकल करते जल के पास बनी प्राकृतिक गुफा मे स्थित है,यहाँ पहुंच कर लगता है की वक़्त थम सा गया है और अगर आप एक अलग एक्सपीरियंस गेन करना चाहते हो तो इस पानी मै नंगे पैर चलकर देखना उसका एहसास अवर्णनीय है | यहाँ हमने कुछ समय बिता कर अपना रुख पांच गुफाओ की और किया मतलब पांडव गुफा |

जटाशंकर महादेव 


पांडव गुफा ये पहाड़ो को काटकर बनायीं गयी गुफा है कहा जाता है की आज्ञातवास के दौरान पांडवो ने एक वर्ष का समय यहाँ बिताया था और कुछ लोगो का मानना है की इन पांच गुफाओ (मणियों) के कारण इस शहर का नाम पचमढ़ी पड़ा |
                                                                  पांडव गुफाओ के पास बना उद्यान इसकी सुंदरता को चार चाँद लगा देता है| यहाँ से हमने रजत प्रपात की तरफ अपना सफर शुरू किया|

पांडव गुफा

उद्यान

पांडव गुफा

रजत प्रपात दुर्गम पहाड़ियों के बीच एक प्राकृतिक झरना है जिसकी ऊंचाई लगभग 350 फीट है चुकी पहाड़ी बहुत दुर्गम थी और हमको आज एक और जगह जाना था तो हमने दूर से ही ये नजारा देखकर आपने नए सफर की और निकल पड़े | हमारा इस दिन का आखरी पड़ाव था हांडी खोह |

रजत प्रपात
हांडी खोह मुख्य मार्ग से 350 फीट नीचे है यहाँ से महादेव गुफा के लिए हरे भरे जंगलो से गुजरना पड़ता है जो बहुत ही मनमोहक है | महादेव गुफा लगभग 20 से 25 फीट चौड़ी और 55 से 60 फीट लम्बी है जहाँ पर प्राकृतिक शिवलिंग विराजमान है यहाँ मे एक बात और बता दो दोस्तों यहाँ पर बंदरो का बूत उतपाद है तो कैमरा , चश्मा या अपना बाकी सामान थोड़ा संभाल कर रखे ,ये बात हमको हमारा कैमरा खोने के बाद पता चली तो थोड़ा संभलकर चलो तो हम वापस आते है अपनी बात पर इस शिवलिंग के सामने एक कुंड है जिसे भस्मासुर कुंड कहते है , वैसे कहते है की भस्मासुर से बचने के लिए महादेव यहाँ पर आकर निवास किया था इस लिए यहाँ महादेव के बहुत अधिक मंदिर है |


हांडी खोह

हांडी खोह

बड़े महादेव

गुप्त महादेव

                                                            इसी गुफा के पास गुप्त महादेव की गुफा है उसके दर्शन करने के बाद हमारे आज के दिन का अंत हुआ लेकिन सफर का नहीं ये सफर अभी और बाकी था अभी चौरागढ़ , धूपगढ़ बाकी था तो अगले दो दिन सिर्फ चौरागढ़ और धूपगढ़ का सफर था उस सफर की कहानी अगले पार्ट मे तब तक के लिए |
                                                                 अलविदा दोस्तों





पचमढ़ी (Queen of satpura) का सफर पार्ट-1

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