Thursday, April 26, 2018

journey to the heart of India (अमरकंटक का सफर )


हेलो दोस्तों
            बंजारा सफर में आप सब का स्वागत है ये सफर है प्रकृति से जोड़ने का और खुद से
            खुद के मिलने का इस सफर में हम रूबरू होंगे ,अपनी कुछ यादो से कुछ इतिहास से
            कुछ जज्बात से इस सफर में जोड़े है मेरे कुछ अनुभव और बहुत सारी यादे |



तो आज हम अपने सफर का आगाज करते है ,भारत के दिल से मतलब मध्य प्रदेश से , मध्य प्रदेश जिसमे माँ नर्मदा की अनुकम्पा हमेशा बनी रहती है ,तो माँ नर्मदा के आशीर्वाद के साथ हमारा सफर शुरू होता है माँ नर्मदा के पावन स्थल अमरकंटक से

अमरकंटक, मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मैकाल पर्वतो में स्थित एक खूबसूरत नगर और माँ नर्मदा का उद्गम स्थल ,जिसके सफर के लिए हमारे सफर की शुरुवात हुई दिल्ली की एयरपोट से जहाँ से हमने जबलपुर के डुमना एयरपोट के लिए उड़ान भरी वैसे जबलपुर भी अपनी कुछ प्राकृतिक धरोहरों और इतिहासिक जगहों के लिए प्रसिद्ध है पर उनका जिक्र हम फाई कभी करेंगे आज बात होगी सिर्फ अमरकंटक के सफर की
                                                            तो हम सुबह 12 बजे जबलपुर में थे जहाँ से हमको  अमरकंटक का सफर तय करना था और क्युकी मेरे पिता हमेशा मुझ से  कहते थे ,कि बेटा अगर लोगो से मिलना है और उनको जानना है तो ट्रैन में सफर करो और खुद को जानना है तो अकेले सफर करो by road तो बस मैने decide कर लिया की में by road ही अपना सफर तय करूँगा अब बस पता करना था किसी गाड़ी का तो बस हमने कुछ कैब का पता किया और और एक dzire,etios बुक की 4610 रूपए में और निकल पड़ा जबलपुर से अमरकंटक के 5 घंटे के सफर पर
                 रास्ते में एक जगह रुक कर हमने खाना खाया और फिर अपना सफर जारी रखा करीब करीब हम 7-7.30 बजे अमरकंटक पहुंच गए यहाँ एक बात और बता दो दोस्तों यहाँ हम का मतलब ये नहीं है की मेरे साथ कोई और भी है बस मेरी आदत मै को हम बोलने की है और वैसे भी हमने कहा ना ये सफर खुद से खुद के मिलने का है , तो पहला दिन तो अब आराम करने का था तो बस मैने एक होटल बुक की और आराम किया क्युकी कल एक नए सफर में जो निकलना था |


       तो हमने दूसरे दिन अपने सफर की शुरुवात की नर्मदाकुंड से जो की नर्मदा का उद्गम स्थल है ,ये ना केवल नर्मदा मंदिर के लिए जाना जाता है बल्कि , भगवान शिव मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, गुरु गोरखनाथ मंदिर, श्री राम जानकी  मंदिर और श्री राधा कृष्ण मंदिर जैसे 16  मंदिरों के लिए भी जाना जाता है | नर्मदकुंड में 6 एकड़ भूमि का एक विशाल क्षेत्र शामिल है और इसमें विभिन्न मूर्तियों की लगभग 23 मूर्तियां शामिल हैं।



यहाँ से हमने रुख किया प्रकृति के एक अदभुत नज़ारे की तरफ कपिल धारा ये अमरकंटक के प्रमुख आकर्षणों में से एक है , महर्षि कपिल मुनि के नाम से इसका नाम कपिल धारा रखा गया है माना जाता है की वो इस जगह ध्यान किया करते थे | यह नर्मदकुंड मंदिरों के उत्तर-पश्चिम की ओर केवल 6 किमी की दूरी पर स्थित है। यह झरना  लगभग 100 फीट लंबा है और हरे रंग के वातावरण से घिरा हुआ है। अगर खुद को फिर से जिन्दा करना चाहते हो और एक शांति का अनुभव करना चाहते हो तो बस अपने आप को इस झरने में डाल दो उसके बाद का जो experience है दोस्तों वो बताया नहीं जा सकता बस जाओ और खुद अनुभव करो|



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         इसके बाद हम ने सफर किया भगवान शिव के मंदिर त्रिमुखी मंदिर का जिसे 'कर्ण मंदिर' भी कहा जाता है ,क्योकि इसे राजा कर्णदेब महाचंद्र ने बनवाया था | ये मंदिर अमरकंटक में एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है,और कलचुरी सभ्यता का एक अद्भुत नजारा है इस के आलावा ये मंदिर और भी बहुत सारे आकर्षणों से घिरा हुआ है जैसे दूध धारा , सोनमुदा, कबीर चबुतरा, माई की बागिया और भुरु का मंडल आदि ये सभी देखने लायक जगह है|

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      त्रिमुखी मंदिर से हम पहुंचे प्रकृति के एक और नज़ारे की तरफ माई की बगिया,यह  नर्मदाकुंड से लगभग 5 किमी दूर स्थित है और आसपास के जंगलों को कवर करती है। माँ नर्मदा को समर्पित कर इसे माई की बगिया नाम दिया गया |  इस प्राकृतिक उद्यान में आपको गुलाब और अन्य फूल पौधों के साथ आम, केला और अन्य फलो  पेड़ भी देखने को मिलेंगे |





1.       और ये सफर यही नहीं रुकना था क्युकी अमरकंटक ऋषि मुनियो की तपोभूमि रहा है और यह  प्रकृति के अद्भुत नजरो से भरा हुआ है अभी सोनमुड़ा देखना बाकी था  जो सोन नदी का उद्गम स्थल है और  जहाँ एक असफल प्रेम कहानी की अनुगूंज  सुनाई देती है |




इसके आलावा भी अभी बहुत कुछ बाकी था जैसे जलेश्वेर महादेव ,भृगु कमंडल ,धुनि पानी जो की पुरानी सभ्यताओं और प्रकृति का अद्भुत संगम है | जहाँ वक्त भी ठहर जाता है लेकिन हम तो बैरागी  है और हम को निकलना था एक नए सफर में  खुद को खोजने तो हम निकल पड़े एक नए सफर की तरफ |

                             
                             तो दोस्तों मिलते है बहुत जल्द एक नए सफर के अनुभव के साथ तब तक के लिए
                                                       
      अलविदा


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